प्यार और चाहत

ये कहानी है  श्री गंगानगर ज़िले के एक क़स्बे की , जो राजस्थान राज्य का एक खूबसूरत जिला है , जहाँ की गलियों में हवाएँ भी प्रेम की कहानियाँ फुसफुसाती है । उस कस्बे में रहती थी पूजा,  एक ऐसी लड़की जिसकी मुस्कान में सूरज की किरणें और आँखों में समंदर की गहराई छुपी थी। पूजा की खूबसूरती और उसका सादा स्वभाव हर किसी को उसकी ओर खींचता था, वो शांत मन तथा पवित्रता समाए जीवन में मस्त रहती थी पर उसके  दिल में कोई नहीं बस पाया, उसे कोई पसंद ही नहीं आया, जिसके लिए उसके दिल में विशेष धड़कन पैदा हो ।

पूजा का सबसे अच्छा दोस्त था आनंद । आनंद , जो अपनी सादगी और गहरी सोच के लिए जाना जाता था। वो पूजा से बेइंतहा प्यार करता था, पर कभी कह नहीं पाया। उसकी आँखों में पूजा के लिए वो प्यार था, जो शब्दों से परे था। वो हर पल पूजा के साथ बिताना चाहता था, पर उसे हमेशा लगता कि पूजा का दिल कहीं और बस्ता है।

दूसरी ओर था रवि , कस्बे का सबसे रंगीन और बिंदास लड़का। रवि को पूजा की हर अदा पसंद थी। वो खुलेआम पूजा को अपनी दिल की बात कहता, उसे इम्प्रेस करने के लिए तरह-तरह के तोहफे लाता, और हर मौके पर उसे हँसाने की कोशिश करता। रवि का मानना था कि पूजा उसकी है, और वो उसे किसी भी कीमत पर पाना चाहता था।

लेकिन पूजा ? पूजा का दिल एक तीसरे शख्स पर आ गया था—कबीर। कबीर, जो कस्बे में नया-नया आया था। वो एक लेखक था, गायक था, जिसके शब्दों में जादू था। कबीर और पूजा की मुलाकात एक किताबों की दुकान पर हुई थी, जहाँ दोनों ने एक ही किताब को एक साथ छू लिया था। उस पल से पूजा को लगने लगा था कि कबीर वही है, जिसका इंतज़ार उसके दिल को था। कबीर की बातें, उसकी आकर्षक आवाज , उसकी गहरी सोच, और उसकी शांत मुस्कान पूजा को हर बार एक नई दुनिया में ले जाती थी।

एक दिन, कस्बे में एक मेला लगा। मेला रंगों, हँसी, और संगीत से भरा था। पूजा वहाँ कबीर के साथ थी, दोनों हँसते-बातें करते हुए मेले की सैर कर रहे थे। आनंद  दूर से उन्हें देख रहा था। उसका दिल टूट रहा था, पर वो चुप रहा। क्यो की प्रेम में त्याग का बहुत महत्व है ,उसे लगता था, “तू प्यार है किसी और का, तुझे चाहता कोई और है।” वो पूजा की खुशी में अपनी खुशी ढूँढने की कोशिश करता, पर उसका दर्द छुपाए नहीं छुपता था।

उसी मेले में रवि भी था। उसने पूजा को कबीर के साथ देखा, और उसका गुस्सा भड़क उठा। उसने सोचा, “तू पसंद है किसी और की, तुझे माँगता कोई और है।” वो पूजा के पास गया और बोला, “पूजा, तुम मेरे बिना अधूरी हो। कबीर तुम्हें क्या दे सकता है? मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दे सकता हूँ!”

पूजा ने रवि की ओर देखा और शांत स्वर में कहा, “श्याम, प्यार माँगने की चीज़ नहीं है। ये दिल से दिल तक जाता है, इसे कहा नहीं जा सकता , सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है ,प्रेम एक पचित्र अहसास है , जिसे जबरदस्ती हासिल नहीं किया जा सकता , ना ही जबरदस्ती किसी के मन में या दिल में पैदा किया जा सकता है । मेरा दिल कबीर के लिए धड़कता है, और ये मेरी सच्चाई है।”

रवि चुपचाप वहाँ से चला गया, और आनंद , जो दूर से सब सुन रहा था, ने भी अपनी आँखों से आँसुओं को छुपाया। उसने सोचा, “शायद यही नियति है। पूजा का प्यार मेरे लिए नहीं, किसी और के लिए है।”

परन्तु रवि का मन पूजा के शरीर को पाना चाहता था , वो बैचैन रहने लगा , उसे अब ये समझ आने लगा की उसे पूजा हर हाल में चाहिए , वो नहीं रह सकता , उसे पाना है । 

उसकी ये मन की काम वासना उसे और खतरनाक बना रही थी , उसने कबीर को मरवाने के लिए गुंडों का सहारा लिया , पर “जाको राखे साइयाँ मार सके ना कोए” , कबीर को बस हल्की चोट आई जो एक दो दिन में

ठीक हो गई , पर रवि की इस गंदी हरकत ने पूजा को एकदम तोड़ दिया । पूजा ,कबीर पर हुए इस हमले को बर्दास्त नहीं कर पाई , उसने निर्णय लिया कि वो रवि से मिलेगी और उसकी इस गंदी हरकत को जवाब देगी । 

रवि , अपने सामने पूजा को देख कर अचरज़ में पड़ गया , उसके शब्द ही जैसे ख़त्म हो गए हो, पूजा ने कहा की तुम इस शरीर से प्रेम करते हो , मुझसे नहीं , तुम्हें सिर्फ़ ये शरीर चाहिए । 

और पूजा ने अपनी शरीर से चुनरी का हटा कर कहा , ये लो , अपने अंदर के शैतान को शांत कर लो , पर कबीर को कुछ हुआ तो मैं भी मर जाऊँगी ।

रवि को अपनी गलती का अहसास हो चुका था कि उसका प्यार सिर्फ जिस्म तक था । उसने पूजा से माफ़ी माँगते हुए वादा किया कि वो कभी भी उन दोनों के बीच नहीं आएगा । 

वक्त बीता। कबीर और पूजा की प्रेम कहानी कस्बे की गलियों में मशहूर हो गई। आनंद  ने अपने दिल को समझाया और पूजा की खुशी में अपनी शांति ढूँढ ली। रवि ने भी समय के साथ अपनी राह चुनी और अपने दिल को नई मंजिल दी।

पर कस्बे की हवाएँ आज भी उस गीत को गुनगुनाती हैं:
तूप्यारहैकिसीऔरका, तुझेचाहताकोईऔरहै।तूपसंदहैकिसीऔरकी, तुझेमाँगताकोईऔरहै।

और पूजा ? वो अपने प्यार के साथ एक ऐसी कहानी लिख रही थी, जो एक पवित्र प्रेम का उदाहरण थी , जो दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी।

प्रेम एक पवित्र अहसास है । प्रेम के लिए किसी का शारीरिक रूप से साथ रहना जरूरी नहीं है , यह एक आत्मिक अहसास  है , जो भावनाओं से बंधा है , जो मन की गति से , आत्मिक ऊर्जा से बंधा है । 

जिसे आप सच्चा प्रेम करते है , उसकी खुशी में ही खुश होना प्रेम है , उसके लिए सदैव दुआए माँगना प्रेम है । प्रेम सात्विक है , पवित्र है । यही निस्वार्थ भावना का  पवित्र प्रेम आपको ईश्वरीय प्रेम / रूहानियत प्रेम से जोड़ता है , क्यो कि ईश्वर प्रेम है और प्रेम ही ईश्वर है । 

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